पर्यावरण के प्रति यादगार पल
पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाएं-
"एक कदम पर्यावरण की और"
“प्रकृति में गहराई से देखना शुरू करो, तुम्हें समझ आएगा कि सब कुछ कितना अच्छा है ।”
आइन्स्टाइन
पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार के लिए सब को शामिल करना होगा
कोरोना वायरस के कारण सब लोग घर पर है तो पर्यावरण में सुधार देखने को मिला वर्तमान समय का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है
"सभी लोग पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाए"
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| World environment day |

धरती मां के लिए मेरे विचार सब कर देना न्योछावर इस पर मान बढ़ाएं इसका मिलकर तन मन जीवन इसे समर्पित कर भास्कर
"वही कर्ता और वही करवाता है क्यू बंदे तू इतराता है इक साँस भी नही है हमारे बस में वही सुलाता और जगाता है ,,,।
गुरुदेव के निर्देशन में सीकर रेलवे स्टेशन का बगीचा इस प्रकार तैयार करके एक नया रूप दिया था जो कि आज तो नहीं है लेकिन उसको याद करना जरूरी है क्योंकि विद्यार्थी ने इसको बनाने के लिए तन मन धन समर्पित किया था इसलिए यह पल हमारे गुरुजनों व विद्यार्थी का महत्वपूर्ण पल था जीवन का और जीवन में हमेशा उत्साह की नई राह मिलती रहे -
"जीवन का वेंटिलेटर ऑक्सीजन है और ऑक्सीजन पेड़ पौधे देते हैं"
पर्यावरण की अहमियत समझाता हूं कैसे सब जोड़ा गर्व से बताता हूं खुद तंगी से जीवन बिताया माता पिता और गुरुदेव के आशीर्वाद से यह सब करवाया - भास्कर
बड़े परिवार में रहने से उसका महत्व या अहमियत का पता चलता है उसी प्रकार पेड़ पौधों की सेवा का महत्व उसमें सेवा करने के बाद पता चलता है
रेलवे विभाग द्वारा केवल आर्टिफिशियल खजूर का पेड़ था लेकिन विद्यार्थीयों ने इस स्थान को ग्रीन जोन में परिवर्तित कर दिया
कुछ समय बाद जब पौधे बड़े हो गए थे तो इस प्रकार डिजाइन बनाया था जोकि बहुत सुंदर दिख रहा है और एक तरफ हमारे गुरुदेव निरीक्षण कर रहे हैं
इस प्रकार पौधों से दीवार बनाई गई और रेलवे स्टेशन का प्रवेश द्वार बेहद सुंदर दिख रहा है
आपके आशीर्वाद व निर्देशन में यह कार्य बहुत अच्छा हुआ था आपको मेरी ओर से प्रणाम जीवन में इस पल को यादगार बनाने के लिए मेरे विचार साझा कर रहा हूं
यहां पर पौधों को पानी दिया जा रहा है और साथ में फोटो खींचकर आनंद लिया जा रहा है ये सभी विद्यार्थी है
हमारे गुरुदेव हमें पेड़ पौधों के बारे में निर्देशन दे रहे हैं
पेड़ पौधों की दीवार कैसे बने इसके बारे में बताया था
सभी विद्यार्थियों का इस बगीचे को बनाने के लिए बेहतरीन सहयोग मिला था विद्यार्थियों की ओर से नेतृत्व मुझे मिला था भास्कर
यहां पर जब पौधों की कटिंग हो गई तो उनका बचा हुआ कचरा को साफ करते हुए नजर आ रहे हैं
यहां पर 2 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान के तहत रेलवे के अधिकारी भी साफ सफाई के लिए अपना योगदान दिया था
2 अक्टूबर को सभी विद्यार्थी और हमारे गुरुदेव इकट्ठे हुए थे और हमें बगीचे के पौधों के बारे में बताया गया था
ये कार्य निस्वार्थ भाव से किया था इसमें शिक्षकों के विचार और विद्यार्थियों के कर्तव्यों का निष्ठा पूर्वक पालन किया गया है
इस प्रकार सुंदर वन वाटिका में अजमेर के गुलाब का सुंदर परिदृश्य देखने को मिल रहा है
भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता
“हमारा कोई समाज नहीं होगा अगर हम पर्यावरण को नष्ट करते हैं ।”
– मार्गरेट मीड
लंबे समय तक सफाई अभियान चला था और पौधों की कटिंग की गई उस पल की तसवीर आपके सामने प्रस्तुत है
सभी विद्यार्थियों ने अपना अमूल्य समय और योगदान दिया था उस पल को याद करने के लिए यह तस्वीरें प्रस्तुत हैं
“मैं ईश्वर को प्रकृति में, जानवरों में, पक्षियों में और पर्यावरण में पा सकता हूँ ।”- पैट बकले
कुछ समय बाद इस प्रकार बगीचा दिखने लगा मानो हवा अदब से बह रही है और पौधे उसमें सुंदर गीत गा रहे है
भले ही आप मतदाताओं को बेवकूफ बना लें पर आप वातावरण को बेवकूफ नहीं बना सकते-डोनेला मेडोज
ये बाहर का दृश्य है पौधों की पूरी कटिंग होने के बाद में यह तस्वीर ली गई जो की आनंद देने वाली है
ऑक्सीजन, भोजन बनाने के लिए फल, अग्नि के लिए काष्ठ, मरने के बाद अंतिम संस्कार भी लकड़ी से होता है
क्या आप वास्तव में यह सोचते हैं की पैसे गिनने की तुलना में आपके द्वारा सांस लेना कम महत्वपूर्ण है।
प्रकृति से प्यार नहीं करता, वह अपने जीवन में कभी किसी से भी प्यार नहीं कर सकता।
पृथ्वी मानव जीवन का आंचल है इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है
मानव जीवन बचाना है तो पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा करनी होगी
प्रकृति का प्रेम पर्यावरण की रक्षा करना है
हवा और पानी, जंगल और वन्य जीवन की रक्षा करने की योजनाएं वास्तव में मनुष्य की रक्षा करने की योजना है। स्टार्ट उदल
अगर करना है दूर प्रदूषण, पेड़ लगाओ, क्योंकि यही है इस धरती का आभूषण।
“जाग जाओ ! मत करो प्रकृति का शोषण, यह करती सभी जीवों का पोषण।”
बचपन गरीबी या अमीरी में बीत सकता है लेकिन आत्मविश्वास तो संघर्ष से मिलता है आजकल आत्मविश्वास देखने को नहीं मिलता हैं
विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरणीय कार्य के लिए सबसे प्रसिद्ध दिन है। 1974 के बाद से , यह हर साल 5 जून को मनाया जाता है
पेड़-पौधे हमें मुफ्त में ऑक्सिजन देते हैं, इसलिए ढेर सारे पड़े लगाओ। क्योंकि जब एक गैस का सिलेंडर खरीदने में इतने पैसे लगते हैं, तो सोचो अगर ऑक्सिजन का सिलेंडर साँस लेने के लिए खरीदना पड़ेगा तो क्या होगा ?
जब आर्थिक विकास पर्यावरण के हितों की अनदेखी करके किया जाता है, तो वह विकास राष्ट्र के लिए मुसीबतें खड़ी करता है
अगर धरा को बनाओगे रेगिस्तान तो यह सब के लिए बन जाएगी श्मशान
इस प्रकार ग्रीन दीवार बनाई लगभग 6 फीट ऊंची है बहुत सुंदर दृश्य था देखने के लिए सुकून देने वाले पल था
पंछियों के लिए परिंदा भी लगाया गया था जीवन में हमेशा सुकून दूसरों को भी दिया जाए वो ही अपना खुशनुमा पल होता है
कोई आज छाया में बैठा है क्योंकि किसी ने बहुत पहले एक पेड़ लगाया था।
वॉरेन बफेट
समय मिलने पर विद्यार्थियों द्वारा अलग अलग तरीके से कटिंग करके सुंदर डिजाइन का रूप दिया था
रेलवे स्टेशन का पूरा स्थल अजमेरी गुलाब के फूलों की सुगंध से महकता था
पौधों की कटिंग करके चारों और दीवार का रूप दिया था बीच में शीशम का पेड़ जो कि वर्तमान में भी देखने को मिलेगा
पर्यावरण की सेवा के लिए विद्यार्थी निस्वार्थ भाव से प्रतिबंध रहे थे
पेड़ पौधों का इस प्रकार जुड़ना कल्पना कीजिए कि एक पेड़ पौधों का परिवार जो भी आया खुशियों से भरा जीवन के पल लेकर गया
यह विद्यार्थी व शिक्षक पौधे लगाते हुए दिख रहे हैं सीकर राजस्थान
हरित्मा परिवार के साथ बिताए ये पल मिलकर कार्य करने की प्रेरणा देता है जो कि आज के समय कठिन होता है वो भी निस्वार्थ भाव की सेवा ह इसमें केवल सेवा भाव ह और पैसे का कोई लेन देन नहीं है केवल कठोर हृदय का आत्म बल है , सीकर राजस्थान
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सभी मिलकर खूब आनंद ले रहे हैं और पर्यावरण के प्रति जागरूकता अभियान चला रहें हैं
पौधा लगाने का कार्य किया जा रहा है
सीकर रेलवे स्टेशन पर पौधे लगाने की शुरुआत मैं खाली मैदान को 1 महीने लगातार साफ सफाई करके पेड़ पौधों उगाने के लिए तैयार किया था
विद्यार्थीयों ने पेड़ पौधे लगाने में 10, 20, और अधिकतम ₹100 का योगदान देखकर लगभग ₹60000 इकट्ठे किया और अन्य योगदान शिक्षकों का रहा था
लगातार पेड़-पौधों की सेवा करने से यह सुंदर दृश्य देखने को मिला
“ये धरती मर रही है क्योंकि मानवजाति इसे नष्ट कर रही हैं, लेकिन यदि पृथ्वी मरती है तो तुम भी मरते हो ।”
आर्थर टोफटे
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सीकर रेलवे विभाग का सहयोग नहीं रहने के कारण आखिरी सांस में इस प्रकार नष्ट हो गया
world environment day
हमें पर्यावरण को सही रखने के लिए
जवाब देंहटाएंपेड़ पोधो को बचाना होगा तभी हम जिंदा रह सकते है क्यूकी अगर पेड़ पोधा नहीं तो ये धरती भी नहीं।