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हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

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होते बहुत है ग़म यहां पर #india

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होते बहुत है ग़म यहां पर © हंसते हुए चेहरे के पीछे, होते बहुत है गम यहां पर मुस्काते हैं लोग मगर, रहती है आंखें नम यहां पर उलझ रहें हैं लोग क्यों अक्सर, अपने ही खयालों से रहते हैं बेचैन यहां सब, अपने अपने सवालों से मस्त सदा रहने वाले भी, घबराते हैं अकेले में थक जाते हैं लोग यहां पर, जीवन के जंजालों से राहों पर यूं चलते गुजरते , रुक जाते हैं कदम यहां पर मुस्काते हैं लोग मगर, रहती हैं आंखें नम यहां पर (हंसते हुए चेहरे के पीछे, होते बहुत हैं गम यहां पर मुस्काते हैं लोग मगर, रहती हैं आंखें नम यहां पर) नहीं जानते लोग कभी, पर्दे के पीछे की बातों को नहीं सोचते नहीं समझते, जीवन के जज्बातों को इस चेहरे की हवाईयां भी, उड़ी उड़ी सी होती है पढ़ना होता सहज नहीं, इन दर्द भरे अल्फाजों को लगता तो खुशहाल है जीवन, होते कितने ज़ख्म यहां पर मुस्काते हैं लोग मगर, रहती है आंखें नम यहां पर (हंसते हुए चेहरे के पीछे, होते बहुत है गम यहां पर मुस्काते हैं लोग मगर, रहती हैं आंखें नम यहां पर) दुनिया के चक्कर में पड़ कर, जीना तुमने छोड़ दिया गैरों की बातों स...

विष्णु दत्त विश्नोई को समर्पित कविता

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 अधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई को समर्पित कविता केवल सत्य हूं मैं...... सरकार से कहा उसने लाख-लाख बार तुम सच्चाई लो मुझसे विछिन्न कर दो समाज में फिर भी  बुराइयों के रास्तों में गिरते तुम्हारे समाज को उठा दूंगा केवल सत्य हूं मैं........  घुप्प अंधेरी रात में  सत्य का दीपक बनकर रोशनी दूंगा क्योंकि मैं केवल सत्य हू.......... मैं बुजदिल नहीं हूं लेकिन राजनीतिक आंधियों के तनाव से   में भुज रहा हूं फिर भी सत्यता की जोत हर दिल में छोड़कर जा रहा हूं   केवल सत्य हूं मैं(विष्णु)......... साहसी, ईमानदार अधिकारी विष्णुदत बिश्नोई को समर्पित  लेखक - भास्कर विचार व्यक्तित्व की पहचान है-भास्कर "आपके नाम का दीपक हमेशा ज्योति देता रहेगा"

Environment And Social Ideas , Politics Ideas, Corona time

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पेड़ को काटने के बहाने तो बहुत हैं बचाने के लिए दिमाग चाहिए.... 🌴Save Tree     Save Life🌴  Save trees for enviroment किसी पेड़ के कटने का,क़िस्सा ना होता...अगर कुल्हाड़ी के पीछे  लकड़ी का हिस्सा ना होता.........उफ़ ये अपने.... सर से बाल उड़ने का किस्सा  न होता   तो तेरी जेब में भी कंघे  का हिस्सा होता ... .उफ़ ये अपने.... किसी देश के लुटने का, क़िस्सा ना होता... अगर सत्ताधारियों के पीछे  चाटुकार का हिस्सा ना होता... ......उफ़ ये जीहुजूरिये.... किसी के ज़मीर के मरने का, क़िस्सा ना होता... अगर उसकी पत्नी का, सरकार में हिस्सा ना होता... ..उफ ये अपने..... किसी मजदूर को पैदल चलने का, किस्सा ना होता अगर  बस की बाईक ना होती ...…उफ़ ये अपने..…... पेड कटा लेकिन बिज मिट्टी में दफ्न थे, किस्सा ना होता नए पेड़ नहीं बनते ..... .....उफ्फ ये सपने..... 5 june World environment day बूढ़ा हो गया, बुढ़ापे मे इतना ना रोता काश  बेटा हमारा नालायक ना होता ...उफ्फ ये अपने..... किसी देश के नागरिकों को ऐसे  हिन्दू मुसलम...

मायड़ भाषा के प्रतिक कन्हैयालाल सेठिया

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मायड़ भाषा के प्रतिक कन्हैयालाल सेठिया राजस्थानी भाषा के महामनीषी स्व. कन्हैयालालसेठिया का जन्म चूरू के सुजानगढ़ में 11 सितंबर  1919 को हुआ  पिताजी छगनलाल एवं माताजी मनोहरी देवी के लाडले कन्हैया लाल सेठिया आपकी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में हुई आपने स्नातक शिक्षा राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से की कन्हैया लाल सेठिया जी का विवाह धापू देवी के साथ हुआ जिनसे 2 पुत्र जयप्रकाश विनय प्रकाश एवं पुत्री संपत देवी हुए कन्हैया लाल सेठिया जी का जीवन गांधी जी से बहुत प्रभावित था गांधीजी के सामान्य खादी का उपयोग करना सादा जीवन उच्च विचार देशभक्ति गरीब और दलितों के उत्थान के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे कन्हैयालाल सेठिया राजस्थानी भाषा के साहित्यकार माने जाते हैं लेकिन आपने हिंदी और उर्दू भाषा में भी साहित्य सर्जन किया है कविता कोश  कन्हैयालाल  सेठिया  कन्हैया लाल सेठिया जी ने गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में सक्रिय भाग लिया और कराची में जन जागरण की अलख जगाई आपकी पुस्तक अग्नि वीणा के प्रकाशन के पश्चात तत्कालीन सर...

कृष्ण प्रेम भगत विचार

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   कृष्ण प्रेम भगत विचार  है कृष्ण नीचता मरोड़ दीजिए अधि की नाथ    या बुरी संगत से मन मोड़ दीजिए  या दूरी से हाथ जोड़ दीजिए मुझे भी  या पापियों की पंक्ति में जोड़ दीजिए तोया तोडा फोड़ दीजिए दयालुता का  या तो मेरा अंतःकरण शुद्ध कर दीजिए या अपना नाम दीनबंधु छोड़ दीजिए सुन रहे हो ना प्यारे वाद-विवाद बताना  तो बात अलग है और यह कहो कि सेटलमेंट करें तो भी आप ही करें  बात तो आपकी बिगड़ी है हमारा क्या बिगड़ा है  मेरे बांके बिहारी कृपा करो ] सिर्फ दर्शनों की उठी अभिलाषा किंतु मम दर्शन फल परम अनूपा जीव पावनि सहज स्वरूपा साधन अनेक बाद साधना दूर की दान करूं  धर्म करूं  मंदिर बनाऊं दिव्य  इतना कहां हंसती है भला मजदूर की एक ही सरल उपाय मिला है बिंदु शायद इसी से काम नहीं चलेगा क्रूर का  जब तक नियम हो नहीं सकता  अब एक ही उपाय है  करूंगा कसूर तो जाकर ही देख लूंगा सूरत हजूर की  प्यारे अपराध का उद्देश्य यमराज की अदालत में गुनाह  के नहीं लेकिन अपराध तो तेरे नाम के...

सरस्वती प्रार्थना

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            सरस्वती प्रार्थना  सरस्वती श्री विग्रह शुक्ल वर्ण हे परम सुंदरी देवी आप सदा मुस्कराते रहते है आपके  परिपुष्ट विग्रह के सामने करोडो चन्द्रमा की प्रभा भी तुच्छ है  विरुद चिंतनमय वस्त्र (कपड़े )पहने हुये आपको सुशोभित कर रहे है आपके एक हाथ में विणा दूसरे में पुस्तक सर्वोत्तम रत्नो से बने हुए आभूषण आपको शुशोभित कर रहे है  ब्रह्मा विष्णु शिव प्रभति प्रदान देवता सुरगुणो से सुपूजित श्रेष्ठ मुनि मनु मानव आपके चरणों में मस्तक  झुकाते है ऐसी भगवती माँ सरस्वती को में भगति पूर्वक प्रणाम करता हु  माँ सरस्वती    याज्ञवलकय जी द्वारा भगवती मां सरस्वती जी की स्तुति  याज्ञवलकय जी - बोले जगन्माता मुझ पर कृपा करो मेरा तेज नष्ट हो गया गुरु के श्राप से स्मरण शक्ति खो गयी है विदया से वर्जित होने के कारन बहुत दुखी हु विधा की अधिदेवते तुम मुझे ज्ञान स्मृति विदया प्रतिष्ठा कवित्य शक्ति , शिष्यों  को समझाने की  सकती तथा गद्य रचना करने की क्षमता दो साथ ही साथ ही अपना उत्तम एवं सुप...

करुणामय ईस्वर को समर्पित कविता श्री कृष्ण

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करुणामय ईस्वर को समर्पित कविता  श्री  कृष्ण        तन मेरा हो भले सांवला  मन से में रंगदार पिया    जीवन तुमको में अर्पण करदु  क्या स्वीकार है पिया तुमको  धन की  दौलत भले नहीं है  मन की जागीरदार पिया  और कुछ नहीं मांगू पिया दे तू अपना प्यार पिया   तन के खोले से भर आ  ना मुझसा कोई यार पिया  तन मेला हो भले मेरा ही  मन है उजाला यार पिया  तु चंदा और में कोचर हु  इतना बस तू जान पिया  जलती सी बाती हु में  तू मेरा उजास पिया  विष्णु पारीक सीकर 

प्रेम का सागर (श्री कृष्णा )

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प्रेम का सागर (श्री कृष्णा ) श्री कृष्णा की प्रेम गंगा  "प्रेम का सागर लिखू  या चेतना का चिंतन लिखू  प्रीति की गागर लिखू  या आत्मा का मंथन लिखू  रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित....... चाहे जितना भी लिखू " ज्ञानियो का गुंथन लिखू  या गाय का ग्वाला लिखू  कंस के लिए विष लिखू  या भगतो का अमृत प्याला लिखू  रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित .......   चाहे जितना भी लिखू  " पृथवी का मानव लिखू  या निर्लिप्त योगेशवर लिखू  चेतना का चिंतन लिखू  या संतृप्त देवश्वर लिखू  रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित .......   चाहे जितना भी लिखू  " जेल में जन्म लिखू  या गोकुल का पलना लिखू  देवकी की गोदी लिखू या यसोदा का ललना लिखू  रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित .......   चाहे जितना भी लिखू  " गोपियों का प्रिय लिखू  या राधा का प्रियतम लिखू  रुकमणी का श्री लिखू  या सत्यभामा का श्रीतम लिखू  रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित .......   चाहे जितना भी लिखू...

दुनिया की ताकतवर ....................

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     दुनिया की ताकत दुनिया की ताकतवर .................... जल ही जीवन है  दुनिया   की   ताकतवर   चीज   है  * " लोहा "  * जो   सबको   काट   डालता   है *. लोहे   से   ताकतवर   है  *" आग "  जो   लोहे   को   पिघला   देती   है ... आग   से   ताकतवर   है  *" पानी " जो   आग   को   बुझा   देता   है ... पानी   से   ताकतवर   है  *" इंसान " जो   उसे   पी   जाता   है ....  इंसान   से   भी   ताकतवर   है  *" मौत "*😭    जो   उसे   खा   जाती   है ....  मौत   से   भी   ताकतवर   है   " दुआ "  👏     जो   मौत   को   भी   टाल   सकती   है ...!     मस्तक   को   थोड़ा   झुकाकर ...

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