हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

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सरस्वती प्रार्थना

            सरस्वती प्रार्थना 



सरस्वती श्री विग्रह शुक्ल वर्ण हे परम सुंदरी देवी आप सदा मुस्कराते रहते है आपके  परिपुष्ट विग्रह के सामने करोडो चन्द्रमा की प्रभा भी तुच्छ है 



विरुद चिंतनमय वस्त्र (कपड़े )पहने हुये आपको सुशोभित कर रहे है आपके एक हाथ में विणा दूसरे में पुस्तक सर्वोत्तम रत्नो से बने हुए आभूषण आपको शुशोभित कर रहे है 

ब्रह्मा विष्णु शिव प्रभति प्रदान देवता सुरगुणो से सुपूजित श्रेष्ठ मुनि मनु मानव आपके चरणों में मस्तक  झुकाते है ऐसी भगवती माँ सरस्वती को में भगति पूर्वक प्रणाम करता हु 

माँ सरस्वती 








 याज्ञवलकय जी द्वारा भगवती मां सरस्वती जी की स्तुति  याज्ञवलकय जी - बोले जगन्माता मुझ पर कृपा करो मेरा तेज नष्ट हो गया गुरु के श्राप से स्मरण शक्ति खो गयी है विदया से वर्जित होने के कारन बहुत दुखी हु विधा की अधिदेवते तुम मुझे ज्ञान स्मृति विदया प्रतिष्ठा कवित्य शक्ति , शिष्यों  को समझाने की  सकती तथा गद्य रचना करने की क्षमता दो साथ ही साथ ही अपना उत्तम एवं सुप्रतिष्ठ शिष्य बनाओ माता मुझे सुप्रसिद्व सत्पुरुषों की सभा में विचार प्रगट करने की क्षमता दो 



माँ सरस्वती 













दुर्भाग्यवश जो मेरा ज्ञान नष्ट हो गया व पुनः नविन रूप प्राप्त  जाये 
जिस प्रकार धूल या राख में छुपे हुए बीज को समायानुसार अंकित कर देते हो वैसे ही तुम भी मेरे ज्ञान को पुनः प्रकाशित कर दो  और अंत:करण शुद्ध कर दो 


जो ब्रह्मस्वरूप परम ज्योति स्वरूपा सनातनी तथा सम्पूर्ण विदया की अधिष्ठात्री देवी उन वाणी देव को बार बार प्रणाम है 



जिनके बिना सारा जगत  सदा पागल के समान हो जायेगा जो वाणी की अधिष्ठात्री देवी उन वांग्देवता  को बार बार प्रणाम है 

जिनकी अंगकारिता हिम चन्दन कुमुद चन्द्रमा तथा श्वेत कमल के समान उज्जवल है जो वर्णो और अक्षरों की अधिष्ठात्री देवी है उन स्वरूपा  देवी को बार बार प्रणाम है 


विसर्ग बिन्दू एवं मात्रा  इन तीनो का जो अधिष्ठान है  व तुम हो इस प्रकार साधु पुरुष तुम्हारी महिमा का गान करते है तुम ही मां भारती हो तुम्हे बार बार नमस्कार है


जिनके बिना सुप्रसिद गणक भी संख्या परिगणक में सफलता नहीं प्राप्त नहीं कर सकते  उन काल संख्या स्वरूपिणी भगवती  मां सरस्वती को बार बार नमस्कार है जो स्मृतिशक्ति  ज्ञानशक्ति  बुद्धिशक्ति तथा प्रतिभा  कल्पना सकती है उन माता सरस्वती को बार बार प्रणाम है 


एक बार सन्तकु के बारे में ब्रम्हा जी ज्ञान पूछा तब स्वयं परमात्मा भगवान श्री कृष्ण वहां पधारे उन्होंने आते कहा प्रजापते तुम उन्ही  इष्ट देवी मां भगवती सरस्वती की स्तुति करो 

देवी ! श्री कृष्ण जी आज्ञा पाकर ब्रम्हा  ने तुम्हारी स्तुति की - हे माँ सरस्वती तुम्हारे कृपा प्रसाद से उत्तम सिद्धांत के विवेचन करने में सफलीभूत हुए 


ऐसे ही एक समय की बात है पृथ्वी ने महाभाग के अंत में ज्ञान का रहस्य पूछा तब शेष जी भी मुश्किल में पड़ गए सिद्धांत नहीं बता सके उनके ह्रदय में घबराहट उत्तपन्न हो गयी तब कश्यप जी की आज्ञा पाकर माँ सरस्वती की स्तुति की इससे शेष जी भ्रम को दूर करने वाले सिद्धांत की स्थापना करने में सफल हुए 



जब व्यास जी वाल्मीकि से पुराण सूत्र के विषय में प्रश्न किया तब वे भी चुप हो गए इस समय वाल्मीकि ने आप जगदम्बा का ही स्मरण किया तब हे माँ सरस्वती तुमसे वर पाकर जिसके प्रभाव से वाल्मीकि सिद्धांत स्थापित करने सफल हुए  तथा प्रमाद को मिटने वाला निर्मल ज्ञान प्राप्त हुआ









 



 

भगवान श्री कृष्ण के अंश व्यास जी वाल्मीकि के मुख  पुराण सूत्र के विषय में सुनकर उनका अर्थ कविता के रूप में विवेचन करने लगे उन्होंने पुष्कर क्षेत्र में रहकर सौ वर्षो तक तपस्या की तब तुमसे वर पाकर कवीश्वर बन गए उस समय वेदो का विभाजन तथा पुराणों की रचना की 
 व्यास जी से देवराज इंद्र ने भगवान शंकर के तत्त्व  ज्ञान के विषय में पूछा  तब क्षणभर माँ सरस्वती का ध्यान कर ज्ञानदेश करने लगे 


तब इन्द्र ने बृस्पति से शब्द शास्त्र के विषय में पूछा उस समय  बृहस्पति पुष्कर क्षेत्र में जाकर हजार वर्ष तक माँ सरस्वती के ध्यान में रहे इतने वर्षो के बाद तुमने (मां सरस्वती) उन्हें वर दिया तब वे इन्द्र को शब्द शास्त्र के विषय में अर्थ समझा सके 

बृहस्पति ने जितने शिष्यों को पढ़ाया जितने शिष्य उनसे अध्ययन कर चुके  वे सब के सब भगवती सुरेश्वरि  मां सरस्वती का चिंतन करने के पश्चात ही सफल हुए 


माता व देवी तुम हो मुनीस्वर मनु मानव सब तुम्हारी उपासना कर चुके है  ब्रम्हा विष्णु शिव प्रभति प्रधान देवता सब तुम्हारी उपासना कर चुके है 

   
जब हजार मुख वाले शेष , पांच मुख वाले शंकर , चार मुख ब्रम्हा तुम्हारे यशोगान करने में जडवत हो गये  तब एक  मुख वाले मानव तुम्हारी स्तुति कैसे कर सकते है इस प्रकार स्तुति करके मुनीश्वर   याज्ञवल्क्य भगवती सरस्वती को प्रणाम करने लगे  उस समय भगति भाव के कारन निरतर जल धाराएं गिर रही थी इतने ज्योति सवरूपा महाकाय का उन दर्शन प्राप्त हुआ 


देवी ने कहा मेने तुम सुप्रख्यात कवी हो जाओ  यह कहकर माँ सरस्वती वैकुण्ठ पधार गयी जो पुरुष यह याज्ञवल्क्य सरस्वती स्तोत्र को पढ़ता है  उसे कवीन्द्र पद की प्राप्ति  होती है और बुद्धिमान एवं सुकवी हो जाता है इस प्रकार याज्ञवल्क्य माँ सरस्वती से ज्ञान प्राप्त किया 

                                            श्री  सरस्वते नम:

टुडे भास्कर - जय श्री श्याम 

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