हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

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कृष्ण प्रेम भगत विचार



   कृष्ण प्रेम भगत विचार 


है कृष्ण नीचता मरोड़ दीजिए अधि की नाथ   
या बुरी संगत से मन मोड़ दीजिए 
या दूरी से हाथ जोड़ दीजिए मुझे भी 
या पापियों की पंक्ति में जोड़ दीजिएतोया
तोडा फोड़ दीजिए दयालुता का 
या तो मेरा अंतःकरण शुद्ध कर दीजिए
या अपना नाम दीनबंधु छोड़ दीजिए
सुन रहे हो ना प्यारे
वाद-विवाद बताना 
तो बात अलग है
और यह कहो कि सेटलमेंट करें तो भी आप ही करें 
बात तो आपकी बिगड़ी है हमारा क्या बिगड़ा है 
मेरे बांके बिहारी कृपा करो ]
सिर्फ दर्शनों की उठी अभिलाषा किंतु
मम दर्शन फल परम अनूपा जीव पावनि सहज स्वरूपा
साधन अनेक बाद साधना दूर की
दान करूं  धर्म करूं  मंदिर बनाऊं दिव्य 
इतना कहां हंसती है भला मजदूर की एक ही सरल उपाय मिला है
बिंदु शायद इसी से काम नहीं चलेगा क्रूर का
 जब तक नियम हो नहीं सकता 
अब एक ही उपाय है 
करूंगा कसूर तो जाकर ही देख लूंगा सूरत हजूर की 
प्यारे अपराध का उद्देश्य यमराज की अदालत में गुनाह  के नहीं लेकिन
अपराध तो तेरे नाम के होंगे इसलिए जाकर ही देख लूंगा सूरत हजूर की
फिर भी तुम नहीं मानते तो 

अहले जलवा हो तुम तो अहले नजर हैं हम 

तेरे पास रूप है तो नजर हमारे पास प्यारे रूप का क्या देखने वाले तो हम हैं
मुस्ताक हम ही नहीं हो तो कीमत क्या है तेरी तेरे नाज और नखरे भले ही सहा है कौन 
अगर हम ना चाहे तो हंसती क्या है तेरी 
ज्ञानी या तपस्वी  ने कहा क्या आई लव यू इसलिए भक्त कहते हैं

अकड़ना तुम्हे भी आता है तो हमे भी आता है 



हे कृष्ण  हम तो विनती कर रहे हैं
 वरना राहों में अगर मिल गए नजर उठा कर  देख भी लिया तो
हंस रहे थे दीदार की ऐसी तैसी 
मेरी चाहत है तुमहे  देखने कि उसे ही जला दूंगा तो क्या करोगे
प्यारे कन्हैया तुम चाहते हो आप की हस्ती और कीमत बनी रहे तो मुझ पर कृपा करनी होगी








योगी न यती (संन्यासी) आकलधी (बुद्धिजीवी) वाना (धनवान) न बनादे 
तुझको श्याम बनाना है तो मस्ताना बना दे 

मैं अपने कर्मों के माध्यम से वह मस्ती नहीं प्राप्त कर सकता 
इसलिए तुम से ही निवेदन है श्याम बनाना है तो 
मुझे आपका मस्ताना ही बना दे

 वही दें जिससे कि तुझे चाह हो मेरी
आप कहोगे की उल्टी बात कैसे कर रहा है

हे कृष्ण आपकी महफिल में हूं तो आपका हूं वरना तो बदल जाता हूं
कीर्ति और प्रतिष्ठा की कामना करता हूं 
अल्प  जीव हूं जैसी संगत वैसी कामना हो जाती है
तुम्हारी महफ़िल हूं तो तुम्हारी बात करता हूं
अल्प जीव हूं इसलिए चाहत भी तो अल्प है
जब तुम चाहोगे तो मेरी बात बन जाएगी 
मैं निश्चित और निर्भर हो जाऊंगा 
वैसे तो भक्ति भी दो प्रकार की होती है
भक्ति जो भगवान को चाहती है साधन भक्ति और 
एक वह व्यक्ति जो भगवान भगवान ही भक्तों को चाहते हैं परा भक्ति 
इसलिए आप सबसे बड़े हो तो आपसे ही प्रेम चाहूं
तुम्हें ही अपनी ओर खींचता होगा 

वह दर्द दे मुझको जो दीवाना बना दे
जिन भक्तों को नजरों में हरदम तुम समाया
बस तुम मुझको उन्हीं नजर का नजराना बना दे
इस दिल को मय इश्क का महकाना बना दे
आंखो के हर एक बिंदु का पैमाना बना दे
योगी न यति  आकलाधि बना दे
वो आह दे जिससे तुझे चाहे हो मेरी
वो दर्द दे मुझको जो दीवाना बना दे






हे गोपाल सांवरिया मेरे 
मेरा कोई नहीं तुम बिन तेरे 
नन्दलाल सांवरिया  मेरे
तेरे द्वार खड़ा तेरे 
हे गोपाल 

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