हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

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Earth day 22 April अप्रैल 22 विश्व अर्थ डे

                           विश्व अर्थ डे



earth day 22 April 

अप्रैल 22 विश्व अर्थ डे सम्पूर्ण विश्व  में मनाया जाता है 
इतिहास में स्वस्छ दिन 
22 अप्रैल 2020 रहा है प्रकृति  के सहयोग से 


22 अप्रैल 1970 को शुरुआत डेनिस हेस ने कि थी डेनिस अर्थ डे समुह के चेयरमैन थे 
इसका आयोजन अख़बार की मदद से 2 करोड़ लोग इकट्ठे हुए थे डेनिस हावर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई बीच  में छोड़कर धरती को बचाने के कार्य में जुट गए

1970 के दसक में कच्चे तेल के दोहन और रिसाव  से समुद्र को नुकसान हो रहा था उसके बचाव के लिए ये अभियान शुरू हुआ इसके बाद अर्थ डे की शुरुआत हुई 



भारत पूरी तरह सौर उर्जा को अपना ले तो ओद्योगिक क्रांति के दुष्प्रभाव से बचने के साथ विकसित देश बन सकता है -डेनिस

   जागरूक रहने के लिए 

हम प्रकृति को नुकसान 
पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है कहते हैं कि जब हम प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है उसका बदला प्रकृति अपने आप ले लेती है 
यही विचार 22अप्रैल 2020 को सत्य हुए की सम्पूर्ण विश्व कोरोनावायरस के संकट से जूझ रहा है
और डाक्टर भी मानव की जान नहीं बचा सकते 

अमेरिका के डाक्टर मीडिया में कह रहे हैं एक कि जान बचा नहीं पाते उससे पहले दूसरी जान पर खतरा मंडरा रहा है लगातार प्रयास के बाद भी मानव की जान नहीं बचा पा रहे है 

    प्रकृति को नहीं बचाओगे तो है मानव, 
    तुम भी भी अपनी जान नहीं बचा सकते 
                            भास्कर 

प्रकृति का संकेत है कि अब भी संभल जाओ वरना तबाही का तो केवल एक पल होता है 

प्रकृति को देना आता है तो लेना भी आता है 

मानव अपने ही कार्य से मरने या बीमारी से ग्रस्त होता है उसका कारण हेनिस कहते है कि अमेरिका में अमेरिकी गाय को मक्का खिलाकर उसका वजन बढ़ाने का कार्य किया जाता है क्योंकि वहां के लोग बीफ खाते है मक्का से गाय में बीमारी फैलती है जब मानव इनके बीफ का सेवन करता है तो वह भी हमेशा के लिए संक्रमित हो जाता है और यह भी कह रहे है कि मांस खाने वाले लोग ज्यादा प्रदूषण फेला रहे है 
वर्ष 2020 में इसका उदाहरण कोरोनावायरस है

कोराना वायरस का प्रभाव -
वुहान चीन में डाक्टर जो इलाज कर रहे थे उनकी बॉडी की चमड़ी का रंग ऐसा बदला की पहचान नहीं सकते है

पृथ्वी को अंजाम दे रहे इसमे करोड़ो की भीड़ शामिल है 
जीवन में पहला अधिकार पृथ्वी और प्रकति का  लेकिन मानव ने इनका इतना दोहन किया है  की इसका असली महत्व जानने के लिए २२ अप्रैल का दिन भी निर्धारित करना पड़ा 
इससे यह साफ़ होता है की मानव प्रकृति की देन मानव समझ नहीं रहा है
पृथ्वी की भलाई को याद करने में हम ३६५ दिन में केवल एक दिन निकालते है और पृथवी हमे २४ घंटे शुद्ध हवा देती है और अपने प्राक्रतिक संसाधन देती है 

1970  से 2020  तक केवल पहला मौका जब मानव अपने घरो में कैद है  पक्षी स्वतंत्र आसमान में उड़ान भर रहे है और मानव द्वारा निर्मित हवाई जहाज धरती पर है लेकिन मानव इसका महत्व कभी नहीं समझा  बड़े बड़े सामाजिक संघटन बनाये पृथवी को पर्दूषण से  आजाद करने के लिए - जागरूकता अभियान चलाये
 फिर भी मानव अपने द्वारा फैलाये गए परदूषण को कम भी नहीं कर पाया 
हजारो करोडो पैसे खर्च करके भी हम पर्दूषण कम नहीं कर  पाए लेकिन 
प्रकृति ने केवल एक महीने में 
     मानव को घर में कैद कर अपना स्वरूप को बदला  है 
    शहरो को शुद्ध हवा मिल रही है 

लेकिन 22 अप्रैल  2020 को (lock-down ) अपने घर में कैद है इसके साथ ही कोरोना का संकट से अस्पतालों में अपना इलाज भी करवा रहा है 

पृथवी भी आज आराम कर रही है और मुस्करा भी रही है तथा संकेत भी दे रही है की मुझ पर मानव का कोई अहसान नहीं है 
अर्थात मानव पृथ्वी प्रकृति और पर्यावरण से बड़ा नहीं है 
हम पृथवी के आँचल पर रह रहे है तो कुछ हमारा भी धर्म है की हम इनकी रक्षा करे 

जब आप बगीचे में लगा फूल आप यदि तोड़ोगे तो भी आप प्रकृति को नुकसान पंहुचा रहे है 

कल कारखाने का शोर था
आज पक्षियों का कलरव है

कल पैसे के लिए भागते लोग
आज पैसे देखकर भागते लोग

पहले मानव माँसारी था
प्रकृति का तांडव देखकर
आज शाकाहारी के शरण में है

पहले पुण्य से पहरेज करते थे
अब दान का महत्व याद कर रहे हो

पहले मंदिर मस्जिद में प्रार्थना
अब मन मंदिर में याद कर रहे है
निर्मल मान से याद कर रहे है

पहले आजादी सस्ती
आज  तेल सस्ता है 



    इति - भास्कर 


















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