हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

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मजदूर बनाम मजबुर , कोरोना प्रभाव

मजदूर हो गये मजबूर
कोरोना वायरस महामारी से बचना है और जीवन को भी बचाना है इन दोनों परिस्थितियों का सामना करने के लिए मजदूर बेबस हो गए
Rajasthan Patrika

"परिस्थितियां मजदूर को मजबूर कर दिया इसलिए यह तस्वीर अपने शब्द स्वयं व्यक्त कर रही है और हम यदि हमारे देश के समाज को ऊपर उठाना चाहते हैं तो केवल हमें इस तस्वीर के माध्यम से ही देश के प्रति जागरूकता और हमारे समाज को ऊपर उठाने के लिए विचार जागृत हो यही इस तस्वीर की प्रार्थना है"
धर्म समाज संस्था और वे राजनीतिक पार्टियां कहां है जिन पर मजदूर वर्ग की आशाएं टिकी हुई होती है आज इस महामारी के संकट में मजदूर वर्ग आपको याद कर रहा है की हमें सरकार की योजना के बारे में अवगत कराएं और हमें भी जागरूक करें हम अपने पैरों पर खड़े हो सके

इसलिए मजदूर मजबूर हो गए की एक मजदूर  के पास सरकारी दस्तावेज राशन कार्ड यहां तक कि आधार कार्ड भी नहीं मिलेगा इसका क्या समाधान हो यह एक विचारणीय विषय है

 मजदूर लोग जहां पर भी काम करते हैं वे अपने गांव कम समय के लिए आते हैं इस वजह से वह सरकारी दस्तावेज नहीं बना पाते या ऐसी व्यवस्था नहीं हो पाती और सरकारी दस्तावेज बनने की भी लंबी प्रक्रिया होती है जिससे समय लग जाता है इसकी वजह से यह मजदूर लोग सरकारी दस्तावेज से वंचित हो जाते हैं

मजदूर लोगों को सरकारी दस्तावेज बनाते वक्त ईमित्र पर ज्यादा पैसा वसूल कर लिया जाता है कभी-कभी तो ऐसी भी परिस्थितियां आ जाती है की उनको गुमराह कर दिया जाता है यह परिस्थितियां तो मैंने कई बार सुना है लेकिन मजदूर वर्ग  में इतना सामर्थ्य नहीं होता है की यह बात आगे तक पहुंचाएं और इनकी बात वास्तविकता से कहें तो सामान्य दिनों में अधिकारी लोग भी इन पर एक्शन नहीं लेते इसका प्रमाण भी मिल जाएंगे

"पारदर्शिता में कमी है या सरकारी आदेश में कमी है या जिम्मेदार जिम्मेदारी निभाने में कमजोर है या जागरूकता में कमी है किसको दोषी कहें यह भी विचारणीय विषय है"

"मजदूर वर्ग के पास राशन कार्ड नहीं है और यदि राशन कार्ड भी है तो भामाशाह कार्ड नहीं है और यदि भामाशाह कार्ड भी बन गया तो NFSA से जुड़ा हुआ नहीं है इसकी वजह से खाद्य सामग्री से वंचित हो जाते हैं"

राजस्थान में 6 महीने पहले NFSA से जोड़ने पर रोक लगा दी गई थी अब यदि इसकी जांच की जाए तो हजारों की संख्या में इस सुविधा से वंचित के फॉर्म सरकार के दफ्तर पर मिल जाएंगे लेकिन इस पर कौन विचार करें यह तो विचारणीय विषय है 

दूसरी परिस्थिति यह भी है यदि सभी दस्तावेज है तो मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ नहीं है इसकी वजह से भी कई वर्ग वंचित हो गए क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से फिंगरप्रिंट मशीन का इस्तेमाल बंद हो गया इसका क्या समाधान हो

आज के इस आधुनिक युग में हम टेक्नोलॉजी का सहारा ले रहे हैं और इसका उपयोग बेहतरीन साबित हो रहा है इसके बावजूद भी हम कई जगह नाकाम हो रहे हैं इसका कारण क्या है 

वर्तमान परिस्थिति कोरोना वायरस के चलते व्यवसाय बंद हो गया और मजदूरों का सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो गया इसका समाधान क्या है 

मेरा मानना है कि यदि सरकार मजदूर वर्ग को ऊपर उठाना चाहती है तो जो भी मजदूर जहां भी कार्य करता है उनके डाटा कलेक्ट किया जाए और उन मजदूरों को सरकारी पोर्टल के माध्यम से जोड़ा जाए और उनको इसके बारे में अवगत कराया जाए 

यदि मजदूरों की जानकारी सरकार के पास होती तो सरकार तुरंत किसी न किसी माध्यम से उनको राशन की व्यवस्था दस्तावेज के माध्यम से भी करवा सकती थी अर्थात एक राज्य से दूसरे राज्य को आदान-प्रदान भी हो सकता था और यदि जानकारी सरकार के पास है तो सरकार सहायता करने में नाकाम है यह कहना भी उचित है

इस समय मजदूर पैदल चल रहे हैं तो सरकार उनके पास नहीं पहुंच पा रही है लेकिन यह बताएं वह व्यक्ति या राजनीतिक पार्टी या एक सामाजिक संगठन कहां है जो वोट के समय हजारों मील दूर होने पर भी वोट दिलाने के लिए संपर्क कर लेते हैं और आने और जाने की व्यवस्था कर देती है क्या किसी महामारी का संकट आ जाए उस समय उन्हें नींद आ जाती है या वे लोग इस समय आंखों से अंधे हो जाते हैं इसका वास्तविक कारण क्या है

अब इस आधुनिक युग में मजदूरों के लिए या तो सरकार जिम्मेदारी लें की इनको जागरूक करें और सरकारी योजना में जोड़ें और इनका जो हक है उनको दिलाने में सरकार मदद करें दूसरा उपाय यह है की मजदूर अपने आप में संगठित हो और सरकार के विरुद्ध आवाज उठाएं 

सरकारी सिस्टम में कोई न कोई कमी है जिसके कारण मजदूरों का हक इन्हें नहीं मिल रहा है सरकार प्रयास तो करती है लेकिन क्या कारण है की सरकारी दस्तावेज बनाने में बाधा आ जाती है और इसकी वजह से वंचित हो जाते हैं

इस लेख के माध्यम जो मैं जानता हूं वह विचार मैंने लिखा है और आप भी अपने विचार मुझे ईमेल के माध्यम से या कमेंट के माध्यम से भेजें हम मजदूरों की लड़ाई को आगे बढ़ाएं और सरकार को भी इससे अवगत कराएं ताकि हमारे निचले वर्ग का भला हो जाए मेरी आपसे अपील है की सामान्य से सामान्य व्यक्ति ने मजदूरों की पीड़ा से अवगत है लेकिन हम मिलकर प्रयास करें और सरकार को अवगत कराएं आवाज उठाएं ताकि देश में जागरूकता हो यदि हम यह प्रयास नहीं करेंगे तो हमारे देश के मजदूर वर्ग का  अहित हो जाएगा और इनका हक इन्हें नहीं मिल पाएगा



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"मजदूर भी देश का एक अभिन्न अंग है"
Today Bhaskar-       "विचार व्यक्तित्व की पहचान है "

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