हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

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मजदूर की व्यथा

   मजदूर की व्यथा
"दवाई का दर्द , धार्मिक उन्माद, राजनीति का नेता, शिक्षित का डिंडोरा, अफवाह का जहर, कोरोना काल में इनका सबसे ज्यादा रोना है"
यदि एक दृष्टि मुझ पर होती तो मैं ईश्वर से प्रार्थना करता लेकिन कोई बात नहीं मैं तो मजदूर हूं इसलिए पैदल चलता था पैदल चल रहा हूं खामोशी तो आपके तजुर्बे को देखकर है मेरी जिंदगी पहले भी चल रही थी अब भी चल रही है आगे भी चलती रहेगी ज्यादा से ज्यादा परमात्मा का प्यारा हो जाऊंगा इससे ज्यादा कुछ नहीं है 
मजदूर भी है और मजबुर भी ह
मजदूर भी है और मजबुर भी है 
जब मजदूर की मां पीड़ा देखकर अश्रु बहाती है तो मजदूर कहता है
क्या कहती हो ठहरो  मां
संकल्प अश्रु-जल-से-अपने।
तुम दान कर चुकी पहले ही
जीवन के सोने-से सपने।
मां तुम ढाल हो जीवन मे
विश्वास-रजत-नग पगतल में।
पीयूष-स्रोत-सी बहा करो
जीवन के सुंदर समतल में।
मजदूर भी है और मजबुर भी है 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दवाइयां पेटेंट की वजह से महंगी हो जाती है इससे आम आदमी व सरकार को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है,

समय का प्रभाव
इस देश में धार्मिक उन्माद फैलाने वाले बहुत है ऐसा कोई धर्म नहीं है जो मानव को खतरे में डालता है अर्थात मानव को कठघरे में खड़ा करता है यह सब गुमराह करने वाले लोग हैं


देश में भलाई हो बुराइयां खत्म की जा सके इस प्रकार के विचार समाज में नही फैलाकर एक दूसरे को धार्मिक मुद्दों पर समाज को उलझा देते हैं यह बस राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है



देश में अफवाह का कारोबार इस प्रकार किया जाता है की सब लोग मानव को तुरंत खत्म करना चाहते हैं अफवाह फैलाने वाले असामाजिक तत्व समाज के कोरोना वायरस से भी बढ़कर दुश्मन है



राजनीति का चोला पहनने वाले से अनुरोध है की आप समाज के भलाई के मुद्दे क्यों नहीं उठाते आप समाज को अंधेरे में क्यों डालते हो आप बाहर से सविधान रक्षक बनते हो और अंदर से उसी समाज को कठघरे में खड़े करते हो

टुडे भास्कर-विचार व्यक्तित्व की पहचान है
सभी देशवासियों को अंधविश्वास धार्मिक उन्माद और राजनीतिक प्रोपेगेंडा से बाहर निकाल कर एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करें जिससे समाज का कल्याण हो
जय श्री श्याम 

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