हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

चित्र
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आँखों से पर्दा उतारे


 क्या कहे , यही सही बदलाव है  
       आँखों से पर्दा उतारे 
ये तस्वीर जम्मू कश्मीर की है जिसमे पाकिस्तान के झंडे से प्रदर्शन  किया जा रहा है भारत हमेशा मानव का बचाव करता जहां तक हो जान को बचाने  की कोशिश करता है लेकिन ये कार्य 
हम जिसे असामाजिक तत्व कहते है वो करते है 
 हमारे देश के युवा को जो भड़काते है क्या हम उन्हें असामाजिक तत्व नहीं कह सकते है
भारत को नुकसान पँहुचाते है ये तस्वीर बोल रही है की हमारी आम आदमी की सम्पति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है 
जो इस प्रकार के कार्य करते है भारत उन पर कारवाही करे ये कैसे गलत है कोनसा कानून , धर्म , पंथ  कहता है की समाज या देश को नुकसान पहुंचाने से जन्नत मिलती है 


इन तस्वीर पर पुलित्जर पुरस्कार दिया गया है भारत एक ऐसा लोकतंत्र है जहां सबसे ज्यादा सवतंत्रता है उसका असामाजिक तत्व फायदा उठाते है ज्यादा सवतंत्रता का मतलब ये नहीं है देश को नुकसान पहुँचाओगे और नाजायज फायदा उठाओगे 

इस तस्वीर में जम्मू कश्मीर के पुलिस की गाड़ी पर पथराव किया गया है क्या यही सबसे अच्छा कार्य है जिसकी तस्वीर खींचने वाले पुरस्कार के भागी है 
इस प्रकार के अवार्ड यदि दिए जाते है तो हम आशा करते है हमारे समाज को जोड़ना के कार्य करेंगे लेकिन ये तो ,समाज के विपरीत कार्य कर रहे है 
ऐसे कार्य करने वाले को पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित करना हमारी नजरो में तो ये कोई नैतिक कार्य नहीं है उपर्युक्त तस्वीर तो हिंसा की तस्वीर है और भारत तो हमेशा अहिंशा का पुजारी है  अर्थात भारत दर्शन तो अहिंशा के दर्शन है

 ये भारतीयता के दर्शन है की माता पिता की सेवा करो बुढ़ापे  में सेवा के भागीदार  बने और सेवा भी नहीं हो तो भारत की शिक्षा कहती है इन्हे पीड़ा मत दो ऐसी भावना से हम जिये जा रहे है 


भारतीय दर्शन में 

हिन्दू मुशलमान कहाते आये किसने ये राह चलाये हिन्दू मुशलमान की एक राह सतगुरु इसे बताई ये विचार भारतीयता देती है इसलिए हम कहते है की जो भारत के प्रति अराजकता फैलाते है और हमारे समाज  व युवा को भड़काते है वो असामाजिक तत्व और आंतकवाद  ही है अर्थात हमारे  समाजके  दुश्मन  है 




इस तस्वीर में शहीद  कर्नल आसुतोष की पत्नी व बेटी है इनकी आँखों में आंसू बह रहे है लेकिन फिर भी कठोर ह्रदय से देश को तन मन और जीवन समर्पित है कोई लाभ पाने के लिए नहीं बल्कि हमारे आम आदमी  आराम से , चयन की नींद से सोये  इसलिए समर्पित है 

असली तस्वीर तो ये है की एक महिला अपना पति खोने के बाद भी अपने कठोर ह्रदय से उन्हें सलाम कर रही है आप देश की सेवा के लिए अपना जीवन न्योछावर किया है और इसलिए ही आवाज उठा रहे है क्या पत्थर बाज अच्छे हे या वो जो देश सेवा भावना रखते है 
इसलिए पुलित्जर पुरस्कार की चर्चा कर रहे है को क्या ये पुरस्कार समाज को तोड़ने के लिए दे रहे हो आप की देश के प्रति भावना क्या है उजागर तो कीजिये 


ये तस्वीर देखकर ये मानव का ह्रदय यदि नहीं पिघलता है तो वास्तविकता से वो इंसान नहीं है क्योकि इसमें एक माँ अपने बेटे को सलामी दे रही है और 80 वर्ष की माँ जब अपने बेटे को सलाम करती है  ये पल उनको जो पत्थर फेकते है क्या कह रहा होगा यदि अहिंशा का पुजारी हो वही जान सकता है 

 इस समय शहीद आशुतोष की पत्नी , पति की समर्पित सेवा के सम्मान में उनके प्रति देश के तिरंगे को अपने ह्रदय से लगाकर  भारत माता से यही प्रार्थना कर रही होगी की हे भारत माता आप अपने सपूत को अपने चरणों में ही रखना समाज के , देश के हर प्राणी की रक्षा के लिए समर्पित हुए है न की किसी को दर्द दिया  है ये विचार मानव अपने दिल में क्यों नहीं रखता जो असामाजिक तत्व की श्रेणी में आते है 


 इस तस्वीर में शहीद की पत्नी अपने पति का चेहरा देखकर यही कह रही होगी की आप तो भारत माता को समर्पित हो गए लेकिन हम तो आप का जो साथ मिला उसी में  हमे भारत माँ का असली हीरो के दर्शन हुए  हम भी आप को कोटि कोटि नमन कर रहे है आप भारत माँ की रक्षा के हमेशा जन्म जन्म समर्पित रहना यही सेवा माता की असली सेवा है 
जज्बा, इंसानियत, मानवता , अंहिसा के रक्षक इसे  नहीं कहोगे तो किसे कहोगे 


इसलिए कह रहे है की समाज में पीड़ा तो और भी बहुत है लेकिन जो सम्मान देश के रक्षक को मिलना चाहिए वो  मत दीजिये लेकिन 

समाज में दरार क्यों करते हो या अपना असली चेहरा तो दिखाओ जिससे आप जो नकाब पहन रखा है उसकी जानकारी तो मिले 
पुलित्जर पुरस्कार का विरोध भारत ही नहीं बल्कि विश्व समुदाय भी करता है जिसकी तस्वीर है 


               क्या ये विचार गलत है तो सत्यता दे या 

किसी देश के समाज को या किसी भी मानव जाती को पीड़ा या संकट में डालकर जो अपना पेट पालते है 
वो असली मानव नहीं है 
वो ही असली चेहरा है जो मानवाधिकार का लगातार उल्घंन कर रहा है इसलिए  कोई भी कार्य हो समाज को , परिवार को , देश को एकजुट करने का प्रयास करे यही कल्याण का कार्य है अन्यथा ये पुरस्कार देने वाले भी असामाजिक तत्व की श्रेणी में खड़े है यही कहना उचित है इसलिए समाज को जगाने का कार्य करे जिससे मानव का ज्यादा से ज्यादा  कल्याण हो सके 
 जय हिन्द जय भारत 

  अंहिसा परमो धर्म 
 हमारा मकसद केवल समाज में या देश में या परिवार में एकजुटता बनी रहे यही कार्य करें अन्य कार्य हमारी संस्कृति के खिलाफ है इसलिए हम बार-बार अनुरोध कर रहे हैं कि हमारी संस्कृति में दखल न दें यही आपका दायित्व है
मोहम्मद साजिद ने मातृभूमि को प्रणाम किया इससे सिद्ध होता है की हम देश के प्रति कोई भेदभाव नहीं करते लेकिन वोट बैंक के चक्कर में और अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए या नाजायज फायदा उठाने के लिए समाज को भड़काने के लिए काम करने वाले केवल असामाजिक तत्व है चाहे कोई भी हो हिंदू मुसलमान सभी भाईचारे से देश के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं केवल असामाजिक तत्व ही समाज को बिखेरने का कार्य करते हैं
टुडे भास्कर - विचार वयक्तित्व की पहचान है 

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