हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

चित्र
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Mother's day

माँ शब्द की व्याख्या करना बहुत मुश्किल है इसी भांति में शिक्षक और विचारक के शब्दों से ही यहां लिख रहा हु  मदर्स डे  शुरुआत संयुक्त  राज्य  अमेरिका से हुई और यह मई के महीने में दूसरे रविवार को मनाया जाता है 20  शताब्दी में अन्ना जार्विस की पहल पर हुई की व्यक्ति मा को नहीं भूले 
भारतीय संस्कृति के अनुसार तो - 
यत्र नार्यस्तु पूजन्ते रमन्ते तत्र देवता 
अर्थात जहां माता बहनो की पूजा हो वहां भगवान निवास करते है और माता का सम्मान नहीं करोगे तो आप अपना जीवन भी नहीं प्राप्त कर पाओगे 

ये तो सास्वत सत्य है इसमें तो कोई दुर्बलता नही है

इस तस्वीर को देखकर क्या कहे 
माता - पिता हमें जीवन बहुत कुछ देते है लेकिन हम इस और ध्यान नहीं देते है ये हमारी संकीर्ण सोच है इसलिए हमे इससे ऊपर उठाना होगा 
माँ आप गीले में सो कर अपने को सूखे में सुलाती है माँ आप भूखी रहकर अपने  बेटे की भूख मिटाती है माँ रात-भर जागकर अपने को नींद की लोरी सुनाती है  
जब माँ की अवस्था आ जाती है और रात-भर जागती अपनी पीड़ा  में 
 हम  रात - भर नींद लेते अपने सुख में और भूल जाते है प्यार और दुआ माँ की लेकिन ये सुख  तो माँ के भाग्य से मिला है 
मां अपने बच्चे को गोद में ही नीद दिला देती है ऐसा स्थान आनन्द कमरे के बेड में ,5 स्टार होटल में भी नहीं मिलेगा और ये कहा जाता है कि मां अपने बच्चे के जन्म के बाद  हृदय से लगाने पर आज का वेंटिलेटर भी फेल है
इस जहां में सब कुछ मिलता है पैसों में लेकिन मां नहीं मिल सकती है
मां आप की कृपा से
हम जिसकी लिखावट हैं, उसके बारे में क्या लिखें❤️
माँ ममत्व का सार है खड़ी मात्रा उसकी प्रहरी चंद्रबिंदु है कुंड प्यार का माँ ,तू जग में प्रभु अवतार...✍️विष्णु
धरती जल और अम्बर से भी बड़ा है तो मां का आंचल है दुनिया की नजर नहीं लगे इसलिए मां अपने आंचल में छिपा लेती है  वो मां होती हैं


मां ही पहचान मेरी , मा ही जन्नत मेरी ,मा ही मुस्कान मेरी मां ही करती उम्र भर, जीवन पथ आलोक मां के आगे क्षुद्र हैं, धरा, गगन,सुरलोक।
माता मूरत प्रेम की, शुचि, सुभाषिनी, धीर, सभ्य सुभाषिनी हरे जगत की पीर
मातृ_दिवस पर आपसे यही कहना है कि मां को खुश रखिए, भगवान खुश रहेंगे। यह सत्य है-मातृ देवो भव:!

इस तस्वीर को देखकर याद आता है की जब मां का बेटा अपने से दूर हो तो इसी प्रकार पत्र लिखे होंगे
जब मां का बेटा बीमार होने पर मां भगवान से रात भर जागकर इसी तरह प्रार्थना करती है कि हे भगवन मेरे इस लाल को जल्दी ठीक कर यह बात तो सास्वत सत्य है लेकिन आज का युग में परिवर्तन हो रहा है वह क्या मां के प्रति हमारी कृतज्ञता खत्म हो रही है कैसे मैंने लगभग हॉस्पिटल में जाकर के जब बूढ़े मां बाप दर्द में हो पीड़ा में हो तब उनके बेटे यही कहते हैं की अब यह संसार छोड़ दे तो अच्छा है लेकिन मां अपने बेटे के प्रति भगवान से यही प्रार्थना करती है कि मेरा लाल अमर रहे
मेरे विचार संकीर्ण है फिर भी यही कह रहा हूं की हमेशा माता पिता का सम्मान करें हो सके उनके प्रति अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करना चाहिए और धन दौलत सब कुछ यहीं रहना है सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं लेकिन माता पिता जीवन में एक बार मिलते हैं वह भी परमात्मा की कृपा से अन्यथा तो यह भी दुर्लभ है यही विचार है और भगवान सबको सन्मति दे की माता पिता का हमेशा सम्मान हो मां अपने बेटे के प्रति कभी बुरा नहीं सोचती है हमेशा ईश्वर से प्रार्थना करती है कि मेरा लाल जुग जुग जिए
मां की संवेदना या मां की भावना हम नहीं समझ सकते कैसे जब बचपन में हमारी चोट लगती थी और मां बस हल्का सा फूंक दे कर के कह देती थी यह लो ठीक हो गया यही भावना अमर रहती है और हम अपने माता-पिता के प्रति यह भाव भी जीवन में नहीं ला पाते इसलिए मेरा यही कहना है धन दौलत से भी बढ़कर अमूल्य हीरा और कुछ नहीं है माता-पिता के अलावा इसलिए हमेशा सेवा भावना ही रखें
मेरा कोटि-कोटि प्रणाम
 यह तस्वीर देख कर बहुत खुशी होगी की मां अपने बेटे को गले लगा रही है और एक तरफ कुछ विचार अपने बेटे को समझा रही है यही तो वह गंगा है यही तो वह तीर्थ है जिसमें हर व्यक्ति को स्नान करना चाहिए यह तीर्थ यह गंगा इसी धरती पर है लेकिन हम अपनी आंखों से पर्दा लगाए हुए हैं जब हम ये पर्दा  आंखों से उतारेंगे तब हमें ज्ञान होगा इसलिए यह तीर्थ और यह गंगा का स्नान का लाभ  में रुकना नहीं चाहिए बस प्राप्त करते रहना चाहिए


 इस तस्वीर में मां अपने बेटे को अपने हाथ से भोजन करवा रही है यही प्रसाद हमें जीवन में मौका मिले तो अवश्य प्राप्त करना चाहिए यह एक अमृत है जिसे जीवन में लेने से व्यक्ति रोगों से मुक्त हो जाता है मेरा मानना है कहने का तात्पर्य यह है कि माता-पिता से जो प्यार प्रेम या आनंद जो भी मिले उसे प्राप्त करने में देरी नहीं करना चाहिए या लेने में भूल नहीं करनी चाहिए मौका मिलते ही प्राप्त कर लेना चाहिए मुझे ऐसा देखकर बहुत खुशी हो रही है की यह मां और यह बेटा कितने भाग्यशाली है की मां अपने बेटे का देश में शासन देख रही है और बेटा मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है मेरी भगवान से भी यही प्रार्थना है ऐसा संयोग जन्म जन्मांतर बनाते रहना
यहां पर मां अपने बेटे को गले लगा रही है यह देख कर मन में हर्ष हो रहा होगा कितनी बड़ी प्रेम गंगा बह रही है जब मां अपने बेटे को इस प्रकार दुआ देती है की मेरा बेटा बहुत आगे बढ़े यही भावना यही विचार हमें अपने जीवन में महसूस करना चाहिए और यही विचार अपने परिवार को या जो भी मित्र हो ऐसी शिक्षा देनी चाहिए भारतीय संस्कृति के अनुसार यह विचार युगों युगों से चलते आ रहे हैं लेकिन हम भूल गए और विदेशी लोगों ने इसकी तारीख भी तय कर दी या ऐसा करें यह कोई 1 दिन नहीं होता है प्रेम का यह तो युगो युगो का प्रेम होता है इसलिए हमारी संस्कृति को भूलना नहीं बल्कि और लोगों तक पहुंचाना है हमारे देश में श्रवण जैसे बेटा भी हुए हैं जो माता पिता के लिए जीवन समर्पित कर दिया यही विचार यही भावना हमारे जीवन में समर्पित हो जाए हे मा ऐसा ही हमें आशीर्वाद दें


खुशियों का दिन आया है जो मांगा वो पाया है माँ की ममता वो छाया है जिसकी गोद मे हमेशा बचपन को ही पाया है।।

बेटी माँ की प्रतिरूप होती है जिस माँ ने बेटी को जन्म दिया वो अमर होती है क्योंकि बेटी पुनः माँ ही होती ह
ये नभ की चिड़िया...ओखली में कुट रही में कटोरी स्वप्न अस्थियां भर रही.हर क्षण परीक्षा और हर परीक्षा जब क्षत-विक्षत कर लौट रही वह विशाला गांधारी-कुंती बनी रही.वह झुकी लेकिन गिरी नहीं संभली खड़ी हुई ढाल बनी कितने ही बसंत बीत गए
' माँ ' ज्वाला..ज्योती बनी रही.
Today bhaskar हर परिवार का कल्याण हो 








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