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हर पल खुशनुमा बने जय श्री श्याम, पार्थ सी एस क्लासेज सीकर, राजस्थान

Human rights

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संतवाणी स्वामीजी महाराज

॥ सन्तवाणी ॥–श्रद्धेय स्वामीजी         श्रीरामसुखदासजी महाराज Saturday, June 25, 2022   आजकी शुभ तिथि–   आषाढ़ कृष्ण द्वादशी, वि.सं.-२०७९, शनिवार  🚩   गीतामें आहारीका वर्णन  - प्रश्न‒आजकल कई लोग जीवरहित अण्डा खानेमें दोष नहीं मानते; यह कहाँतक उचित है ? उत्तर‒जीवरहित होनेपर भी वह साग-सब्जीकी तरह शुद्ध नहीं है, प्रत्युत महान् अशुद्ध है; क्योंकि वह अण्डा महान अपवित्र रज (रक्त) और मांससे ही बनता है । माताएँ-बहनें जब रजस्वला हो जाती हैं, तब उनको हम छूते भी नहीं, दूरसे ही नमस्कार करते हैं; क्योंकि उनको छूनेसे अपवित्रता आती है । रजस्वला स्त्रीकी छाया पड़नेसे साँप अन्धे हो जाते हैं और पापड़ काले पड़ जाते हैं । जलाशयको छूनेसे उसमें जीव-जन्तु पैदा हो जाते हैं ।  अन्न, वस्त्र आदिको छूनेसे वे अपवित्र हो जाते हैं । कारण कि रजस्वला स्त्रीके शरीरसे जहर निकलता है, जिसके निकल जानेपर वह शुद्ध हो जाती है । इस प्रकार जिस रजको अपवित्र मानते है, उसी रजसे अण्डा बनता है ।  अतः अण्डा खानेवालेमें वह अपवित्रता आयेगी ही जो व्यक्ति जीवरहित अण्डा खा...

STATE TREE OF RAJASTHAN KHEJARI राज्य वृक्ष खेजड़ी

STATE TREE OF RAJASTHAN KHEJARI राज्य वृक्ष खेजड़ी ' मैं बड़ीसिड की खेजड़ी बोल रही हूँ"""""""""""" मानव जाति का प्राचीनतम ग्रन्थ है ऋग्वेद। ऋग्वेद में संसार का सबसे पवित्र वृक्ष शमि (खेजड़ी) अर्थात मुझे ही बताया गया है। मैं जाँटी,खेल्डी,छौंकरा आदि के नाम से भी जानी जाती हूँ और मानव-पशु-पक्षी को माँ जैसा दुलार देती हूँ। मेरी पवित्रता राजस्थान का हर ग्रामीण अनूभूत करता है। मैं सैकड़ों कहावतों का हिस्सा हूँ,लोकाचार का हिस्सा हूँ। सबसे गुणकारी और स्वादिष्ट सब्जी मेरी ही फली सांगरी है। मैं धर्म व आस्था का केन्द्र हूँ। राजस्थान में मुझे तुलसी की तरह पूजा गया। घर के चौक में मेरा होना सौभाग्य का कारक है। मैं वैदिक सभ्याता की प्रकृति पूजा का अवशेष हूँ। दशहरे को मेरी भगवान की तरह पूजा होती है। सबसे बड़ी बात मैं मौसम वैज्ञानिक की भूमिका भी बखूबी निभाती हूँ। एक कहावत है "काळ खांगड़ा सम्मत सांगरी" अर्थात मैं जितनी फलती फूलती हूँ उतना ही अच्छा जमाना होता है। मैं किसी भी मौसम में नहीं मुरझाती परन्तु जब बरसात का इं...

महाराज जयचंद, जागना जरूरी है

इतिहास को जाने सत्य को स्वीकार करे और अपनो तक पहुंचाए अंधेरे से उजाले की और भास्कर ज़मर्रा की बातचीत में हम अक्सर देशद्रोही के रूप में "जयचंद" का नाम सुनते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोकप्रिय कथाओं में उन्हें एक शासक के रूप में गलत तरीके से चित्रित किया गया है,  जिन्होंने तराइन की दूसरी लड़ाई (1192 सीई) में पृथ्वीराज चौहान की पीठ में छुरा घोंपा था।  इन आख्यानों के अनुसार, जयचंद ने अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी, पृथ्वीराज को उखाड़ फेंकने की योजना बनाकर मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद गोरी को भारत में पैर जमाने के लिए आमंत्रित किया और उसकी सहायता की।  हालांकि, सीवी वैद्य, रोमा नियोगी, आरसी मजूमदार और अन्य जैसे प्रसिद्ध इतिहासकारों ने ऐसे झूठे दावों को खारिज कर दिया है और साबित कर दिया है कि जयचंद को देशद्रोही के रूप में चित्रित करना पूरी तरह से निराधार है। एक गद्दार के रूप में जयचंद की प्रचलित धारणा मुस्लिम ग्रंथ ऐन-ए-अकबरी से उपजा है,  जिसने चौहानों के खिलाफ घुरिदों के साथ जयचंद पक्ष की कथा को फैलाया और प्रचारित किया।  आइन-ए-अकबरी तराइन की लड़ाई के 400 साल बाद लिखी गई थी।...

हार कर नही बैठना है, रख ह्रदय पर पत्थर

।। हार कर नही बैठना रख हृद्धय पर पत्थर ।। में हार जाता हूं तो आपकी शिकायतें सब मंज़ूर हैं गुरुदेव पर जरा मुस्कुराकर कहना....😊 मुझे विश्वास है मेरी मुस्कराहट की हिफाज़त खुद खुदा करे.. बस यही दुआ हर रोज़ आप खुदा से करते है.. क्या हुआ तो जो जल गया आशियाना हमारा, दूर तक रोशनी तो करेगे यही लक्ष्य हमारा लंबे सफर में रुक जाना अच्छा नहीं है । संयम, मेहनत और विश्वास छोड़ना नहीं है यही तो आपका कहना है। "यूँ तो मेरे सफर से शिकायतें बहुत थी इस जिंदगी में... मगर दर्द जब दर्ज कराने गए तो कतारे बहुत लम्बी थी।" अब शिकायतें तुम से नही पर मुझे खुद से ही हैं, माना की सफर मेरे थें, और उन पर यकिन तो मेरा है!! एक दिन जीत होगी, हार पर मुकदमा होगा । हार जाना हार नहीं , हार मानना ही हार है।। आपका विश्वास है और मेरा विश्वास है। एक दिन जरूर में आत्मविश्वास में बदल दुगा.... ........ भास्कर कभी कभी लगता है कि इन नज़रो पर मुकदमा लगाकर कैद में डाल दूँ सदा के लिए जय श्री श्याम कहने पर ।। क्यूंकि हर पल खुशनुमा रहता हूं , जय श्री श्याम कहके इसलिए सखिया मेरी... कहने लगी ◆ ◆ ◆ ...

विचार का जीवन से विश्वास भी जगाए

यदि हम मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता ।। और हम घर में ही भटके हैं तो कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे।। ठौर ठिकाने पर कौन लाता है वो जो शौहरत की अंधी दौड़ में खुद को आजमाना चाहते है ।। उन्हें भटका हुआ क्यों कहें हम जो घर में रह कर अपना मानकर परायों का फर्ज निभाना चाहता है ।। हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।- धार देखनी हो तो क़लम को पकड़ो तलवारें तो खामखां बदनाम हैं   अनमोल जीवन पर तलवार नहीं है इंतजार की घड़ियां घर में करती है किसी का सीना याद में धड़क रहा है सपने, शिद्दत, संकल्प, दर्द और यादें ये सब ज़हन में तमाम लिए बैठा हूँ । मुस्कुराता हूँ शहर के हर मायूस चेहरे की तरफ़ साहब, मैं दिल में मेरा गाँव लिये बैठा हूँ । ये दिल्ली, मुम्बई क्या समझेंगे मेरी मिट्टी का मोल, ख़ुशियों की फ़सल की हर खाद लिए बैठा हूँ, मेरी दादी के नक़ली दांत भी हंसते हैं इनसे ज़्यादा,...

कुछ विचार , जीवन में बदलाव लाते हैं

दान करने से रुपया जाता है! *”लक्ष्मी नहीं!* घड़ी बंद करने से घड़ी बंद होती है! *समय नहीं!* झूठ छुपाने से झूठ छुपता है! *सच नहीं !* माना दुनियाँ बुरी है ,सब जगह धोखा है, *फिर भी सेवा भाव रखे*  हम तो अच्छे बने ,हमें किसने रोका है ! *मानवता तो जगाए* रिश्तें  मौके  के नहीं, मोहताज होते है। *भरोसा के ह* कुछ रिश्ते दरवाज़े खोल जाते हैं ! *या तो दिल के, या आँखों के *  उम्मीद ना कर हमदर्दी की, बड़े प्यार से जख्म देते हैं                       *सिद्त से चाहने वाले को* .........…..................….................................... "हे परमात्मा" आप का कुछ तोड़ने का मन करे तो मेरा गरूर तोड़ देना आप का कुछ जलाने का मन करे तो मेरा क्रोध जल देना आप का कुछ बुझाने का मन करे तो मेरी घृणा बुझा देना आपका प्यार करने का मन करे तो मेरी और देख लेना । "मैं शब्द तुम अर्थ, तुम बिन मैं व्यर्थ" ......…..….................................. मुस्कुराना ही खुशी नही होती, उमर बिताना ही जिंदगी नही होती, खुद से ज्यादा ख्याल रखना पडता है...

पधारो म्हारे देश, राजस्थान

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पधारो म्हारे देश, राजस्थान राजस्थानी लोगों को छोड़कर शेष दुनियां को लगता है कि राजस्थान में पानी नही है और यहां खून सस्ता पानी महंगा हैं...जबकी यहाँ सबसे शुद्धता वाला पानी जमीन में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है*। राजस्थान के लोगों को पूरे विश्व में सबसे बड़े कंजूस कृपण समझा  * जाता है ...जबकि पूरे भारत के 95% बड़े उद्योगपति राजस्थान के हैं, राममंदिर के लिए सबसे ज्यादा धन राजस्थान से मिला है* *राजस्थान के लोगों के बारे में दुनियां समझती है ये प्याज और मिर्च के साथ रोटी खाने वाले लोग हैं ...जबकि पूरे विश्व मे सर्वोत्तम और सबसे शुद्ध भोजन परम्परा राजस्थान की हैं यहां का बाजरा विश्व के सबसे पौष्टिक अनाज का खिताब लिये हुए हैं*। *राजस्थानी लोगों को छोड़कर शेष दुनियां को लगता है कि राजस्थान के लोग छप्पर और झोपड़ियों में रहते हैं इन्हें पक्के मकानों की जानकारी कम हैं ..जबकि यहां के किले इमारतें और उनपर अद्भुत नक्कासी विश्व मे दूसरी जगह कहीं नही है.. यहां अजेय किले और हवेलियां हजारों वर्ष पुरानी है   ...राजस्थान में चीन की दीवार जैसी ही दूसरी उससे मजबूत दीवार भी है जिसे दुनिया में पहचान ...

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